विधि साक्षरता है ‘नए भारत’ की सबसे बड़ी जरूरत

हमारे देश में छात्रों के लिए विधिक शिक्षा का प्रावधान स्नातक स्तर से ही शुरू होता है। हालांकि, इससे पहले, विद्यार्थियों को नागरिक शास्त्र के रूप में, थोड़ी-बहुत जानकारी जरूर दी जाती है, लेकिन इसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता है। इसका दुष्परिणाम यह होता है कि वयस्क होने तक भी हमारे विद्यार्थियों के पास अपने ही देश के कानून के बारे में मूलभूत जानकारियां भी नहीं होती हैं। जब ये बच्चे एक नागरिक के रूप में किसी विधि संकाय से कोई कानूनी मदद लेने की कोशिश करते हैं, तो इन्हें कानूनी प्रक्रिया, अपने संवैधानिक दायरे, कर्तव्यों और यहां तक कि अधिकारों के बारे में भी बहुत कम जानकारी होती है। देश में वैधानिक शिक्षा के ऐसे ही मौजूदा स्वरूप पर बातचीत करने के लिए आज हमारे साथ हैं अधिवक्ता और विधिक मामलों के जानकार अमिताभ नीहार। पूरा आलेख पढ़ने और साक्षात्कार में पूछे गए सवालों पर अपनी राय व्यक्त करने के लिए महज एक रुपये में अभी सब्सक्राइब करें...

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