बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं।

क्या आगरा के डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय को बचाने के लिए कुछ किया जा सकता है? यह महत्वपूर्ण प्रश्न तब और भी गंभीर हो जाता है जब उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा गिरावट के निम्न बिंदु पर पहुंचती दिखती हो, जबकि राज्य के शिक्षा मंत्री ताज नगरी से आते हों...

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"रटकर सीखने से कोई फ़ायदा नहीं होता।" शिक्षकों से अक्सर सुनी जाने वाली इस उक्ति ने एक बहस को जन्म दिया है कि क्या बेहतर है - भारत की रटकर सीखने वाली शिक्षा प्रणाली या पश्चिमी मॉडल जो रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच पर ज़ोर देता है?

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दिल्ली में एक आईआईटीयन राजनीतिज्ञ बन गया, दूसरा दिल्ली आईआईटीयन लेखक बन गया, जबकि कई अन्य प्रशिक्षित इंजीनियर नौकरशाही में शामिल हो गए, कई तो फिल्म एक्टर और गायक ही बन बैठे। बहुत से प्रशिक्षित इंजीनियर राजनीति में सिर्फ इसलिए शामिल हो जाते हैं, क्योंकि वे कई तरह के दबावों वाली इंजीनियरिंग परियोजनाओं या परिसरों में काम करने के लिए अयोग्य होते हैं...

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शमशाबाद जैसे छोटे शहरों से लेकर मथुरा जिले के एक गांव तक, नए खुले सभी विद्यालय, कॉन्वेंट टाइप के अंग्रेजी माध्यम के स्कूल हैं। चुंगी का स्कूल या बेसिक स्कूल कहे जाने वाले सरकारी स्कूल हिंदी माध्यम वालों के लिए हैं...

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जबसे स्कूलों में बच्चों की पिटाई बंद करने का फरमान जारी हुआ है, तबसे मास्साब का रुतबा और खौफ उड़नछू हो गया है। घर में पेरेंट्स परेशान, स्कूलों में अध्यापक, अनुशासन, शिष्टाचार, अदब कायदे सब पश्चिमी सोच की लहर में बह गए हैं। भय बिन प्रीत या सम्मान कब, कहां किसको मिलता है। राऊडी स्टूडेंट्स को पनिशमेंट मिलना ही चाहिए, कैसा और कितना, इस पर बहस हो सकती है...

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आजकल हिंदू मंदिर और तिरुपति का लड्डू प्रसाद चर्चा में हैं। कुशल प्रबंधन के अभाव में तीर्थ यात्रियों और नियमित भक्तों को तमाम तरह की परेशानियों और बाधाओं से जूझना पड़ता है। कई हादसे भी होते रहते हैं। ऐसे में मंदिर जाने के अनुभवों को यादगार क्षण कैसे बनाया जाए, कैसे व्यवस्थाएं दुरुस्त हों, कैसे आर्थिक पारदर्शिता आए और कैसे साधनों का बेहतर उपयोग हो, इन विषयों को लेकर एक नया पाठ्यक्रम शुरू किया गया है...

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