भारत की शिक्षा व्यवस्था के अंधेरे गलियारों में आखिर रेंगता क्या है? सपने? महत्वाकांक्षाएं? उम्मीदें? या फिर कुछ और? आधी रात को मेज पर झुका एक टीनएजर। लाल आंखें। थका हुआ शरीर। सामने बिखरे टेस्ट पेपर। दूसरी ओर माता-पिता, जो कोचिंग की फीस भरने के लिए कर्ज़ और कुर्बानियों का हिसाब लगा रहे हैं।
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