एक युवा ने त्रिपुरा में उगा दी कश्मीरी सेब की फसल...

कृषि प्रधान देश भारत में अब युवाओं का सपना डॉक्टर, इंजीनियर और सरकारी सेवाओं में जाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे अब अपनी मिट्टी से भी जुड़ने लगे हैं। आलम यह कि खेती में वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक को अपना कर उत्पादन बढ़ाने के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही कमाल कर दिखाया है, त्रिपुरा के विक्रमजीत चकमा ने, जो यूट्यूब और गूगल की मदद से, त्रिपुरा में कश्मीरी सेब कूल के उत्पादक बन गए हैं।

दरअसल, पेचारथल निवासी विक्रमजीत चकमा ने राज्य में आत्मनिर्भरता की एक बेहतरीन मिसाल कायम की है। उन्होंने कश्मीरी सेब कूल की फसल लगाई है। महज ढाई लाख रुपये के निवेश से एक साल में छह लाख रुपये की आमदनी संभव हो पाई है। उन्हें उम्मीद है कि अगले साल यह आय दोगुनी हो जाएगी।

इससे पहले, त्रिपुरा में कश्मीरी सेब कूल की फसल नहीं देखी गई है। ओबीसी निगम के फील्ड ऑफिसर विक्रमजीत चकमा ने अपने चाचा और दो भाइयों को साथ लेकर चुनौतीभरे माहौल में फसल का उत्पादन शुरू किया। उनके अनुसार अगर बांग्लादेश की धरती पर इस फल को उगाना संभव है, तो त्रिपुरा में यह असंभव नहीं है। उनका मानना है कि त्रिपुरा की मिट्टी और जलवायु किसी भी फसल के लिए पूरी तरह से अनुकूल है।

फल की खेती के अपने शुरुआती अनुभव के बारे में विक्रमजीत बताते हैं कि चाचा चंचल कुमार चकमा और दो भाइयों रंजीत चकमा और बिश्वजीत चकमा का इस सफलता में बहुत बड़ा योगदान दिया है। उनकी वजह से ही कश्मीरी सेब की कूल प्रजाति की फसल संभव हो पाई है। उनके अथक परिश्रम की बदौलत अधिक लाभ पाया है। पहले मेरे चाचा और दो भाई अपनी जमीन पर आलू, मूली आदि की खेती करते थे। ऐसे में सभी खर्चों को छोड़कर कुल 10 से 12 हजार रुपये सालाना की आमदनी संभव होती थी। इसलिए, मैंने उन्हें कश्मीरी सेब की कूल प्रजाति के लगाने की सलाह दी और पिछले साल इसकी खेती शुरू कर दी।

चकमा बताते हैं कि उन्होंने पौधे लाने की सारी जिम्मेदारी ली। इसी के तहत करीब सात एकड़ जमीन में 1300 पौधे लगाए गए। उचित देखभाल के साथ, फसल इस साल जनवरी में कटाई के लिए तैयार हो गई। उन्होंने कहा कि जनवरी से मार्च तक सभी फसल को काटकर बिक्री के लिए तैयार किया गया। उन्होंने अनुमान लगाया कि लगभग 40 क्विंटल कश्मीरी सेब कूल की कटाई हो चुकी है।

आय दोगुनी करने को लेकर उनका तर्क है कि इस साल एक शाखा से अधिकतम 25 किलो और न्यूनतम आठ किलो फल प्राप्त हुआ है। अगले साल उस उपज में बहुत वृद्धि होगी। इसमें 70 से 80 क्विंटल फल आसानी से मिल जाएगा।

विक्रमजीत बताते हैं कि कश्मीरी सेब कूल की उपज में जैविक विधि काफी फायदेमंद साबित हुई है। हालांकि, थोड़ा डीएफई का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन, पानी की सही मात्रा के साथ रोपाई को बढ़ने में देर नहीं लगी। उन्होंने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि मैं जो पौधा लेकर आया हूं, उस कश्मीरी सेब के पेड़ से इतना सारा फल मिलेगा। सिर्फ सही देखभाल के साथ, साल-दर-साल अच्छी मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने यहां तक दावा किया कि अगले साल उन्हें दोगुना परिणाम मिलेगा।


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