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शैक्षिक समानता को बढ़ावा दे रहे हैं केंद्रीय और नवोदय विद्यालय


भारतीय शिक्षा प्रणाली देश के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाती है। यह लाखों छात्रों में ज्ञान, कौशल और मूल्यों को बढ़ावा देती है और सामाजिक तथा आर्थिक विकास की आधारशिला का काम करती है। इसी ढांचे के अंतर्गत, केंद्रीय विद्यालय संगठन और जवाहर नवोदय विद्यालय समिति भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन स्वायत्त निकायों के रूप में कार्य करते हैं। दोनों ही देश भर में उच्च-गुणवत्तापूर्ण, समान शिक्षा प्रदान करने के लिए समर्पित हैं।

केवीएस राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप राष्ट्रीय एकीकरण और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देते हुए, मुख्य रूप से केंद्र सरकार के स्थानांतरणीय कर्मचारियों, जिनमें रक्षा और अर्द्धसैनिक बल के कर्मचारी, राज्य सरकार के कर्मचारी और अन्य सार्वजनिक श्रेणी के कर्मचारी शामिल हैं, और इसके अलावा एकल बालिकाओं को समान तथा तनाव-मुक्त शिक्षा प्रदान करने पर केंद्रित है।

Read in English: KVS and NVS driving educational equity…

इसके उलट, एनवीएस, योग्यता-आधारित चयन के ज़रिए प्रतिभाशाली ग्रामीण बच्चों को मुफ्त आवासीय शिक्षा प्रदान करता है, जिसका मकसद शहरी-ग्रामीण शैक्षिक अंतर को पाटना और समग्र विकास को बढ़ावा देना है। यह भी एनईपी 2020 के अनुरूप ही है। सामूहिक रूप से, ये संस्थान विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के 15 लाख से अधिक छात्रों को शिक्षा प्रदान करते हैं, और भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में समावेशी विकास और समानता में योगदान करते हैं।

केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूल, जिन्हें व्यापक रूप से केंद्रीय विद्यालय कहा जाता है, अपनी स्थापना के बाद से ही सरकारी कर्मचारियों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं। दूसरी ओर, नवोदय विद्यालय समिति के अंतर्गत आने वाले स्कूल, जिन्हें व्यापक रूप से नवोदय विद्यालय कहा जाता है, निःशुल्क आवासीय शिक्षा के माध्यम से ग्रामीण प्रतिभाओं को सशक्त बनाने का कार्य करते हैं। दोनों ही सीबीएसई का पालन करते हैं, जिससे समग्र शिक्षा और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलता है।

केवीएस की स्थापना 1962 में केंद्रीय विद्यालय संगठन से हुई थी। केवी स्कूलों का मकसद स्थानांतरणीय और गैर-स्थानांतरणीय सरकारी कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक ज़रुरतों को पूरा करना है, और इसके लिए उन्हें बार-बार स्थानांतरण के बीच एक समान शिक्षा कार्यक्रम प्रदान करना है।

हाल के वर्षों में, केवीएस एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के रूप में विकसित हुआ है, जिसका निरंतर विस्तार मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रस्तावों द्वारा संचालित है, जिसमें वंचित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है।

सभी केंद्रीय विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध हैं और बालवाटिका I, II और III तथा कक्षा 1 से कक्षा 12 तक के पाठ्यक्रम का पालन करते हैं, जो राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा- 2023 और नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुरूप है। पाठ्यक्रम में समग्र विकास पर ज़ोर दिया जाता है, जिसमें शैक्षणिक, पाठ्येतर गतिविधियों और कौशल-आधारित शिक्षा पर खास ध्यान दिया जाता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के तहत वर्ष 1986 में शुरू किए गए, आवासीय, सह-शिक्षा सुविधाओं के ज़रिए ग्रामीण प्रतिभाओं को पोषित करने के लिए दो पायलट स्कूलों के साथ शुरुआत की। इसका मकसद ग्रामीण पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली बच्चों को उनकी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बगैर मुफ्त, उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना है।

अक्टूबर 2025 तक, देश भर में 662 नवोदय विद्यालय कार्यरत हैं। सभी एनवीएस स्कूल कक्षा छह से बारहवीं तक सीबीएसई पाठ्यक्रम का पालन करते हैं, और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के दिशानिर्देशों के मुताबिक, बहुभाषावाद और सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए तीन भाषा सूत्र, क्षेत्रीय भाषा, हिंदी या अंग्रेजी, और छात्र प्रवास से जुड़ी एक तीसरी आधुनिक भारतीय भाषा, को लागू करते हैं।

केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय समिति दोनों ही विज्ञान प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और खेल मैदानों जैसी सुविधाओं के लिए सीबीएसई मानदंडों का पालन करते हैं। उनके संबंधित बुनियादी ढांचे उनकी परिचालन प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं, उदाहरण के लिए केवीएस उन्नत तकनीक एकीकरण के लिए शहरी पहुंच का लाभ उठाता है और जेएनवी आत्मनिर्भरता के लिए ग्रामीण व्यवस्थाओं को मज़बूत बनाता है। केंद्र सरकार से मिलने वाली बजटीय सहायता से केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों के संचालन की निरंतरता और विस्तार सुनिश्चित होता है।

नवोदय विद्यालय के लिए, आवासीय कार्यों और ग्रामीण निर्माण को प्राथमिकता देते हुए, वर्ष 2024-25 के लिए अनुदान सहायता के रूप में 5370.79 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 1 अप्रैल 2024 तक प्रारंभिक शेष राशि 585.34 करोड़ रुपये को भी वर्ष 2024-25 के दौरान उपयोग करने की अनुमति दी गई है, साथ ही वर्ष के दौरान 44.70 करोड़ रुपये की आंतरिक प्राप्तियां भी प्राप्त हुई हैं। इस प्रकार, वर्ष 2024-25 के दौरान नवोदय विद्यालय के पास उपलब्ध कुल राशि 6000.83 करोड़ रुपये थी।

साल 2025 में, केवीएस और एनवीएस, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की नींव पर आधारित अपनी नीति-संचालित वृद्धि और तकनीकी समावेशन जारी रखे हुए हैं। ये विकास न केवल शारीरिक क्षमता में बढ़ोतरी करेंगे, बल्कि छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए नई शिक्षण पद्धतियां भी पेश करेंगे।

1 अक्टूबर को, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देशभर में 57 नए सिविल क्षेत्र के केवी की स्थापना को मंजूरी दी, जिसका कुल परिव्यय 2026-27 से नौ वर्षों की अवधि में करीब 5,862.55 करोड़ रुपये है। कुल निधि में पूंजीगत व्यय, जैसे, भूमि, भवन व उपकरण, के लिए आवंटित 2,585.52 करोड़ रुपये और परिचालन व्यय के लिए 3,277.03 करोड़ रुपये शामिल हैं। यह पहल वंचित जिलों को लक्षित करती है, छात्रों के लिए पहुंच बढ़ाती है और बहुभाषावाद और कौशल एकीकरण जैसे एनईपी लक्ष्यों को मजबूत करती है। इसी पहल को और आगे बढ़ाते हुए, 913 केवी को पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया योजना के तहत अपग्रेड किया गया है।

6 दिसंबर, 2024 को सरकार ने 28 नए नवोदय विद्यालयों की स्थापना को मंज़ूरी दी। 2024-2025 से 2028-2029 तक, पांच वर्षों में 2,359.82 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है। इसमें 1944.19 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय और 415.63 करोड़ रुपये का परिचालन व्यय शामिल है।

केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय समिति, दोनों ने वर्ष 2025 में अत्याधुनिक डिजिटल पहल शुरू की हैं, जिसके तहत शिक्षा तक समान पहुंच के लिए पीएम श्री से सहयोग का लाभ भी उठाया जा रहा है। इस साल अक्टूबर में अपडेट किए गए केवीएस के व्यापक आईसीटी ढांचे के मुताबिक 90 फीसदी स्कूलों को स्मार्ट कक्षाओं, एआई-संचालित अनुकूल शिक्षण उपकरणों और वर्चुअल लैब से सुसज्जित किया जाएगा, जिससे व्यक्तिगत एनईपी के अनुसार सामग्री के लिए दीक्षा प्लेटफॉर्म के ज़रिए हाइब्रिड सत्र सक्षम होंगे।

अब तक, सभी नवोदय विद्यालयों में प्रयोगशालाओं सहित कुल 9,417 स्मार्ट कक्षाएं स्थापित की जा चुकी हैं। 311 नवोदय विद्यालयों में समर्पित लीज्ड लाइन इंटरनेट कनेक्शन है और शेष नवोदय विद्यालयों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी है। इसके अलावा, स्थायी परिसरों में स्थित सभी नवोदय विद्यालयों में एक समर्पित कंप्यूटर प्रयोगशाला है। आईटी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए, नवोदय विद्यालय प्रत्येक नवोदय विद्यालय की आवश्यकताओं के अनुसार डेस्कटॉप या लैपटॉप प्रदान करने के लिए कार्य कर रहा है।

वर्तमान में, प्रत्येक नवोदय विद्यालय में लगभग 40 डेस्कटॉप हैं, इस प्रकार सभी नवोदय विद्यालयों में लगभग 26,118 डेस्कटॉप हैं। पीएम श्री परियोजना के अंतर्गत 312 डिजिटल भाषा प्रयोगशालाएं भी स्थापित की गई हैं, साथ ही सीबीएसई सीएसआर परियोजना के अंतर्गत 100 अंग्रेजी और 100 हिंदी भाषा प्रयोगशालाएं भी स्थापित की गई हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, लगभग सभी नवोदय विद्यालयों को पीएम श्री स्कूलों के रूप में मान्यता दी गई है, जिनकी वर्तमान संख्या 620 है, जो आदर्श संस्थानों के रूप में कार्य करते हैं और अन्य स्कूलों के लिए एक मानक स्थापित करते हैं। यह योजना ग्रामीण प्रतिभाओं के पोषण को एनईपी के समान फोकस के साथ एकीकृत करती है, जिसमें स्कूलों को डिजिटल कौशल केंद्रों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों से सुसज्जित नवाचार केंद्रों के रूप में परिवर्तित किया जाता है। इस सहयोग से शैक्षणिक परिणामों में सुधार देखने को मिलता है और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा भी मिलता है, जिससे केवीएस और एनवीएस एक कुशल, एकजुट भारत के निर्माण में अग्रणी बनते हैं।

जैसे-जैसे डिजिटल और ढ़ांचागत विकास, उच्च-स्तरीय शिक्षा को मजबूत कर रहा है, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा भी आधारशिला के रूप में उभर कर सामने आ रही है। यह केवीएस को संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक और शारीरिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 3-8 वर्ष की आयु से, समग्र विकास के एनईपी 2020 के दृष्टिकोण के साथ संरेखित करता है।

एनईपी प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या और शैक्षणिक ढांचे के ज़रिए एक खेल-आधारित, बहुभाषी ईसीसीई पाठ्यक्रम को अनिवार्य बनाता है, जो ग्रेड 3 तक बुनियादी साक्षरता और बेहतर संख्या हासिल करने के लिए आनंद के साथ शिक्षा हासिल करने पर जोर देता है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सार्वभौमिक पहुंच कायम करना है। यह आधारभूत चरण केंद्रीय विद्यालय व्यवस्था में सहजता से एकीकृत होता है, जो युवा शिक्षार्थियों को सरल बदलाव के लिए तैयार करता है, जबकि वंचित क्षेत्रों में समानता पर भी काम करता है।

केवीएस अपने बालवाटिका कार्यक्रम के माध्यम से ईसीसीई में अग्रणी है, जो 505 स्कूलों में संचालित है, जो गतिविधि-उन्मुख मॉड्यूल के माध्यम से प्रारंभिक कौशल पर ध्यान केंद्रित करता है जिसमें खेल, कला और बुनियादी साक्षरता का मिश्रण होता है, जिससे औपचारिक स्कूली शिक्षा के लिए तनाव मुक्त प्रस्तावना में हजारों लोगों का नामांकन होता है।

हांलाकि एनवीएस मुख्य रूप से कक्षा 8-12 तक की शिक्षा प्रदान करता है। यह प्रवेश स्तर के पाठ्यक्रम में आधारभूत सुधार को शामिल करके ईसीसीई का पूरक है। यह एनईपी के उस फोकस क्षेत्र के अनुरूप है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त कमियों को व्यावसायिक और डिजिटल माध्यमों से पाटने पर ज़ोर दिया गया है, जो प्रारंभिक कौशलों पर आधारित हैं। यह बदले में एक ऐसा दायरा बनाता है, जहां बालवाटिका के स्नातक निरंतर समग्र विकास के लिए योग्यता-आधारित जेएनवी प्रवेश में योगदान करते हैं। यह एकीकृत दृष्टिकोण समान प्रारंभिक नींव सुनिश्चित करता है, जिससे दोनों प्रणालियों के 15 लाख से अधिक छात्र ज्ञान-संचालित भविष्य में फलने-फूलने के लिए सशक्त होते हैं।

कुल मिलाकर, केवीएस और एनवीएस, 16.5 लाख से अधिक छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के लिए शहरी पहुंच को ग्रामीण सशक्तिकरण के साथ स्थापित करते हैं। मजबूत बुनियादी ढांचे, रणनीतिक वित्त पोषण और 2025 तक 57 नए केवी और 28 एनवी सहित नियोजित विस्तार के साथ, दोनों संस्थान एनईपी 2020 के समग्र, कौशल-केंद्रित शिक्षा के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहे हैं। 1,213 स्कूलों में पीएम श्री योजना के तहत उन्नयन और बालवाटिका के ज़रिए ईसीसीई एकीकरण से प्रेरित होकर, ये संस्थान डिजिटल विभाजन को पाटते हैं, राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देते हैं और भविष्य के नेताओं को तैयार करते हैं, ताकि प्रत्येक बच्चा एक जीवंत, समावेशी भारत में योगदान दे सके।



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