आज के भारत में अगर किसी बेरोजगार युवक से पूछो कि “क्या कर रहे हो?”, तो ज्यादातर जवाब आता है — “आईएएस की तैयारी कर रहा हूं।” जैसे दुनिया में समाज सेवा करने का बस एक ही रास्ता बचा है — कलेक्टर बनो!। राजधानी दिल्ली के कुछ इलाकों में ऐसे ‘उड़ान’ के सपने देखने वाले युवाओं और कोचिंग सेंटर, फोटो कॉपिंग शॉप की भरमार है। हॉल ही में एक फिल्म भी इसी विषय पर पुरस्कृत हुई है...
Read More




