आजकल भारत में पीएचडी की बड़ी धूम है। हर साल करीब 30 से 35 हजार लोग डॉक्टरेट की डिग्री हासिल कर रहे हैं। विश्वविद्यालयों में शोधार्थियों की संख्या साढ़े तीन लाख के आसपास पहुंच चुकी है। कागज़ पर यह तस्वीर बहुत शानदार दिखती है। लेकिन, ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही कहानी सुनाती है...
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