कुछ वक्त पहले तक, भारत में महिलाओं के ज्यादातर काम अनदेखे ही रहते थे। उनके कामों का ज्यादातर हिस्सा घरों, पारिवारिक उद्यमों और अनौपचारिक भूमिकाओं तक ही सीमित था, जिनका आधिकारिक दस्तावेज़ों में शायद ही कभी ज़िक्र दिखता था। उनका योगदान तो निरंतर था, लेकिन उन्हें मिलने वाली मान्यता सीमित थी। लेकिन, अब स्थिति बदल रही है और देश के श्रम परिदृश्य को नया रूप दे रही है...
Read More




