ग्रामीण भारत के एक ढहते हुए सरकारी स्कूल में कदम रखें, फिर एक चमचमाते निजी संस्थान की दहलीज पार करें, असमानता वज्रपात की तरह आपको कौंधा देगी। एक बच्चा, मोटा है, लाड़-प्यार में पलता है तो दूसरा, खोखली आंखों वाला, मुफ़्त मिड डे मील के लिए कटोरा थामे खड़ा है...
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