Latest News: राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएफटी) ने ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि 13 जनवरी तक बढ़ाई * IIMC launches PhD Programme, Marking a new academic milestone in its 60-year legacy * संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (II), 2025 की लिखित परीक्षा के परिणाम घोषित

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जैसे दवा की दुकान पर प्रशिक्षित फार्मासिस्ट रखना अनिवार्य है, ठीक वैसे ही ठेकेदारों को भी ट्रेंड सिविल इंजीनियर्स रखना अनिवार्य किया जाए ताकि निर्माण कौशल और गुणवत्ता में सुधार हो।

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Dust-choked roads, bridges collapsing at breakneck speed, and schools reduced to rubble—this is the reality of our so-called ‘development’! In a country where billions of rupees from the public treasury are poured like water, the common people are left with shoddy work and broken promises. This contractor system has turned the nation’s progress into a looting spree, where quality is sacrificed at the altar of corruption. It’s a poison eating away at India’s development from within.

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​"Rote learning bears no fruit" This phrase, often heard from teachers, has sparked an ongoing debate: Which is better—India’s rote-based education system or the Western model that emphasizes creativity and critical thinking?

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किसी भी देश की शिक्षा व्यवस्था में उच्च शिक्षा एक महत्वपूर्ण स्तंभ होती है। उस स्तंभ का आधार, उस देश की संस्कृति, मूल्य एवं संस्कार ही होते हैं, जिनके अनुरूप छात्रों को उच्च शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए। भारत में भारतीय शिक्षा नीति 2020 इसी आशा के साथ लाई गई थी कि इस नीति के क्रियान्वयन के पश्चात भारतीय शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन आएगा और भारत पुनः विश्वगुरु बनेगा, परंतु अभी तक ऐसा सम्भव नहीं हो पाया है।

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हाल ही में एक आईटी कंपनी ने कई प्रशिक्षुओं को नौकरी से निकाल दिया। इसके बाद काफी शोर-शराबा और विरोध प्रदर्शन हुआ। हायरिंग कंपनी के द्वारा आउटसोर्स किए गए कुछ निजी प्रशिक्षकों ने कहा कि "जिन लोगों को निकाला गया, उनमें संचार कौशल की कमी थी और महीनों की ट्रेनिंग के बावजूद उनकी भाषाई क्षमताओं में कोई सुधार नहीं हुआ।"

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भारत में शिक्षा इसकी उस प्राचीन दार्शनिक परंपरा में गहराई से अंतर्निहित है, जहां विद्या को महज ज्ञान के संचय के रूप में नहीं बल्कि समग्र आत्म-सशक्तीकरण के साधन के रूप में देखा जाता था। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में कहा गया है कि ‘ज्ञान की संपदा वास्तव में सभी प्रकार की संपदाओं में सर्वोच्च है’...

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