कस्बे के छोटे से घर में सन्नाटा पसरा था। टूटी खिड़की से आती धूल जैसे घर के भीतर की बेचैनी को और गहरा कर रही थी। पिता चुपचाप अख़बार ताक रहे थे, मां बार-बार आंचल से आंखें पोंछ रही थी। जगदीश को दिल्ली भेजने का सपना, यूपीएससी की कोचिंग का ख्वाब, पैसों की दीवार से टकराकर चकनाचूर हो गया। जमा-पूंजी नाकाफ़ी थी, कर्ज़ का रास्ता डरावना। बहन की आंखों में भी टूटा हुआ भरोसा झलक रहा था। यह सिर्फ़ एक परिवार की कहानी नहीं थी। कोचिंग की महंगी फीस ने देशभर के हज़ारों घरों को अपाहिज कर दिया है, जहां सपने हैं, काबिलियत है, पर साधन नहीं...
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