Latest News: राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएफटी) ने ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि 13 जनवरी तक बढ़ाई * IIMC launches PhD Programme, Marking a new academic milestone in its 60-year legacy * संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (II), 2025 की लिखित परीक्षा के परिणाम घोषित

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भारत एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय बदलाव के कगार पर खड़ा है। साल 2050 तक बुजुर्गों की आबादी कुल जनसंख्या की 30 फीसदी से अधिक हो जाएगी। यह प्रवृत्ति बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और बढ़ती जीवन प्रत्याशा का परिणाम है...

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"रटकर सीखने से कोई फ़ायदा नहीं होता।" शिक्षकों से अक्सर सुनी जाने वाली इस उक्ति ने एक बहस को जन्म दिया है कि क्या बेहतर है - भारत की रटकर सीखने वाली शिक्षा प्रणाली या पश्चिमी मॉडल जो रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच पर ज़ोर देता है?

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Once the centre of mathematics and astrology, India is today lagging in this field on the international horizon. Ask any student, the most intimidating subject will be mathematics. No one wants to become Ramanujam, while knowledge of mathematics is the first step to becoming an engineer, doctor or accountant.

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Since the order to stop caning in schools was issued, the authority and fear of teachers have vanished. Parents at home are troubled, and in schools, teachers, discipline, etiquette, and manners have all been swept away by the wave of Western thinking. Without fear, love or respect is never achieved.

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जबसे स्कूलों में बच्चों की पिटाई बंद करने का फरमान जारी हुआ है, तबसे मास्साब का रुतबा और खौफ उड़नछू हो गया है। घर में पेरेंट्स परेशान, स्कूलों में अध्यापक, अनुशासन, शिष्टाचार, अदब कायदे सब पश्चिमी सोच की लहर में बह गए हैं। भय बिन प्रीत या सम्मान कब, कहां किसको मिलता है। राऊडी स्टूडेंट्स को पनिशमेंट मिलना ही चाहिए, कैसा और कितना, इस पर बहस हो सकती है...

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एक अनुमान के तहत वैश्विक आबादी का 60 फीसदी हिस्सा किसी न किसी रूप में रोजगार से जुड़ा है। इसलिए, कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य को महत्व देना अनिवार्य हो गया है।

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