कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने भारतीय तकनीकी स्नातकों को विश्व पटल पर छा जाने का एक जबर्दस्त मौका दिया है। अंग्रेजी जानने वाले विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के स्नातक दुनिया में सबसे ज्यादा हर वर्ष हमारे देश से निकलते हैं। जरूरत गुणवत्ता सुधारने की है। 2024 में पूरे विश्व में दो लाख 77 हजार पीएचडी अवॉर्ड हुईं, अमेरिका में 77 हजार, चीन में 56 हजार, और भारत में सिर्फ 23 हजार। सॉफ्टवेयर सेवाओं में भारत आज चौथे नंबर पर है। हमारे डॉक्टर विश्व के अनेक देशों की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ की हड्डी हैं, लेकिन अपने देश में मेडिकल इंडस्ट्री ग्लोबल हब नहीं बन सकी है।
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