यूजीसी ने विश्वविद्यालयों में कुलपति और शिक्षकों को लेकर सुधारों की एक साहसिक पहल की है। जिन लोगों को डिग्री धारकों को नौकरी देनी है, यदि उनकी भी शिक्षा व्यवस्था में कुछ दखल हो तो हर्ज क्या है। पांच वर्षों से नई शिक्षा नीति पूर्णतया लागू नहीं हो पा रही है। उच्च शिक्षा की बदहाली जग जाहिर है। आगरा विश्वविद्यालय को ही देख लें, कितना परिवर्तन हुआ है...?
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